मधेपुरा, बेलहा और सौगढ़ धार के बीच बसा एक छोटा सा शहर है, जिसे एक गर्वित स्टेडियम ने और भी जीवंत बना दिया था।
इस शांत नगर की एक जिज्ञासु और पढ़ाई में समर्पित लड़की का नाम था रिंकिया।
एक शांत पार्क में, रिंकिया अपने पढ़ाई में लीन थी, और चिरपिंग बर्ड्स और रहस्यमयी रौशनी के बीच वह अपने सपनों की दुनिया में डूबी हुई थी।

रिंकिया: (ध्यान से) इस शहर की सुंदरता का रहस्य बहुत कुछ कहता है।
अचानक, उसकी नजर एक रहस्यमयी चीज पर पड़ती है। स्टेडियम के पीछे, सूर्यास्त के समय, वह देखती है कि वहां एक लड़की खड़ी है।
रिंकिया: (आश्चर्य से) कुछ अजीब सा हैवह स्टेडियम की ओर बढ़ती है और जब वह पहुंचती है, तो वह देखती है कि वह एक लड़की है।
रिंकिया: (आवाज़ लगाते हुए) अरे रुको! कौन हो तुम?हुए)
लड़की: मैं वो हूँ जो तुम्हें तक़दीर में दिखाई गई हूँ।(मुस्कराते हुए) मैं वो हूँ जो तुम्हें तक़दीर में दिखाई गई हूँ।
रिंकिया: तक़दीर में? तुम हो कौन ?
रिंकिया: क्या तुम… भूत हो?
लड़की: (हंसते हुए) हां, पर मैं अच्छा हूं, और मैं तुम्हें मदद कर sakti हूं।
रिंकिया थोड़ी देर के लिए चौंकी रहती है, लेकिन फिर उसने भूत से बातचीत करना शुरू किया।रिंकिया: (आत्मविश्वास से) तुम कौन हो?
लड़की: (हंसते हुए) मेरा नाम मीरा है, और मैं तुम्हें तुम्हारे अध्ययन में मदद करना चाहती हूं।
रिंकिया: (आत्मविश्वास से) अच्छा है, मैं मदद करने के लिए तैयार हूं।रिंकिया: तुम मुझे कैसे मदद कर सकती हो?
मीरा: (प्यार भरी मुस्कान के साथ) मैं तुम्हें आत्मविश्वास दिलाने में मदद कर सकती हूँ।
रिंकिया ने अनगिनत रातों तक मीरा के साथ अपनी पढ़ाई
में मेहनत की, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। वह सफलता की ऊँचाइयों को छूने में सफल हुई।
एक रात, जब रिंकिया और मीरा उसके अध्ययन में डूबी हुई थीं, एक ताजगी ने उन्हें घेर लिया।रात के अंधेरे में, वे पास के एक रहस्यमयी चीज की ओर बढ़े।
वहां पहुंचते ही, वे देखती हैं कि वहां कुछ और है।
रिंकिया: (बेहद हैरान होकर) यह तो बहुत ही अजीब है।
रिंकिया: “इधर आओ, मीरा।”
रिंकिया और मीरा दोनों ही एक दूसरे को देखकर हैरानी में हैं। उन्होंने देखा कि एक पुरानी नोटबुक padi है।
रिंकिया: (आश्चर्य से) इसमें क्या है?
मीरा: (रहस्यमय अंदाज में) कुछ तो अद्वितीय है, रिंकिया। रिंकिया नोटबुक खोलती है और उसमें लिखा हुआ पढ़ती है:
रिंकिया, तुम्हारी मेहनत और संघर्ष ने मेरा दिल जीत लिया है। अब तुम्हारी ज़िन्दगी अपने ही सफलता की ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। ध्यान रखो, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं, तुम्हारी सहायता करती रहूँगी। – मीरा”
रिंकिया का चेहरा चमक उठता है और वह मीरा के साथ गले लगती है।
रिंकिया: (मुस्कराते हुए) मैं तुम्हारी सहायता के लिए कैसे शुक्रिया अदा करूं, मीरा?
मीरा: (हंसते हुए) मेरा मकसद तुम्हारी खुशियाँ हैं, रिंकिया।
इसके बाद, रिंकिया और मीरा एक-दूसरे के साथ नए रहस्यों का सामना करने लगती हैं। उनकी दोस्ती और उनके बीच का संबंध और भी मजबूत होता जाता है।
समय बीतता है और रिंकिया एक सशक्त और सफल व्यक्ति बनती जाती है, जिसने अपने सपनों को पूरा किया है। उसकी मित्रता मीरा के साथ हमेशा बनी रहती है, और उनका साथ उन्हें हमेशा उच्चाईयों तक पहुंचाता रहता है। वे दोनों अब भी कभी-कभी मिलती हैं, और उनकी दोस्तीं एक खासी बात है।
कई सालों के बाद जब एक बार मधेपुरा आया तो रिंकी मिली , मैंने हँसते हुए पूछा- “की गए रिंकिया तोहर भूतनी दोस्त केहन छौ ” | रिंकी ने हलके से मुस्कुरा के कहा- “मेरी दोस्त बहोत मस्त है एज ऑलवेज़ “|
तो दोस्तों आपको क्या लगता है? सच में मीरा कोई भूत थी या फिर रिंकी की कल्पना या कल्पना और हकीकत के बीच कोई एक पहेली |
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स्टेडियम के पीछे वो लड़की कौन थी ?
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